दोस्ती -

लेखक/ लेखिका - दूर्वा चतुर्वेदी

रेशमा और शबनम पक्की सहेलियां थीं| दोनों पढाई में तो अव्वल थीं ही, साथ-साथ खेलकूदमे भी कुशाग्र थीं| हर साल की तरह इस वर्ष भी स्कूल में वार्षिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी तरह की प्रतियोगिता राखी गई| रेशमा और शबनम ने भी दौड़ में भाग लिया| प्रतियोगिता कार्यक्रम शुरू हुए, की दोनों सहेलियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गई|

आज दौड़ प्रतियोगिता में दोनों सहेलियां दौड़ने के लिए खेल के मैदान पर पहुंचीं, कुछ समय बाद दौड़ शुरू हुई| दौड़ते-दौड़ते अचानक रेशमा का पैर शबनम के पैर से टकराया और शबनम गिर पड़ी| इसी कारण रेशमा दौड़ में प्रथम आ गईऔर शबनम को सांत्वना पुरस्कार मिला|

इससे दोनों की दोस्ती के बीच दरार पद गई| शबनम ने रेशमा से बातचीत करना उससे मिलना एकदम बंद कर दिया | दो  दिन बाद होली थीं| रेड़मा अपनी चाट पर खड़े होकर होली का आनंद भरा माहौल देखने लगी और सोचने लगी कि कैसे शबनम और वो टोली में शामिल होकर मस्ती करते हँसते-गाते एक-दूसरे सा गले मिलते, सोचते-सोचते रेशमा कि आँखे छलछला आयी| तभी उसे शबनम कि आवाज सुनाई दी|

उसने पलटकर देखा, तो वास्तव में शबनम पीछे खड़ी थी| रेशमा, शबनम को देखते ही दौड़कर उसे गले से लगा लिया और दोनों रो पड़ी,गले लगाते ही शबनम बोली रेशमा मुझे माफ़ कर दो| मैंने तुम्हें गलत समझा, तब दोनों सहेलियां एक-दूसरे के आंसू पोंछ ख़ुशी से गले मिलीं, मिठाई खाई और होली से नयी दोस्ती का हाथ मिलाया|

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